शनिवार, 3 जुलाई 2010

एक कविता प्यार के विरह में

"प्यार " बस ये ढाई शब्द बहुत हैं , जीवन को रस से भरने के या फिर नीरस करने के . सच्चा प्यार जब किसी से होता है तो ऐसा लगता है कि इस लड़की के पास आने पर संगीत बज उठता है . प्यार पर कुछ लिखना अपने आप में अद्वितीय होता है . आशा है आपको मेरी ये नयी थीम पसंद आएगी . सब कुछ सच्चाई है झूठ या कल्पना नहीं .  उसके बिछड़ने के एहसास आज तक बिलकुल ताजा है . अनुभूति इतनी कि सैंकड़ो कविताये लिखी जा सके . तो मैं शुरू करता हूँ उसके प्यार को समर्पित :-

सांसो में आज तक उसकी रूह समायी है 
सारा जग मेरे साथ फिर भी क्यों तन्हाई है 

सितारों से उसकी मांग सजाने का जब सपना जगा था 
हाथ मेरे कलम करने को कोई अपना ही लगा था

किसी तरह उस गुलाबी रंगत वाली को पाना था 
आखिरी कदम पर बिछड़ जाना एक फ़साना था 

सच्चे प्यार में ही ईश्वर दिख गया था 
ख़ुशी मेरी सारी  उसके  नाम लिख गया था 

दर्द उसका दिल में लिए जीना श्राप हो गया था 
लोग कर गए पर मेरा कहना भी पाप हो गया था 

उसकी चाहत में दुनिया के रस्मे तोड़ ली थी 
पर उसने बाद में मुझसे राहे क्यों मोड़ ली थी 

मेरे सवालो के जवाब उसकी आत्मा से मांगता हूँ 
बस मेरी गलती बता दे पर मैं जवाब जानता हूँ 

उसकी दीवानगी  क्यों मुझे हंसाकर रुला गयी 
बची सारी जिन्दगी में तड़पना सिखा गयी 

बस वो मेरे शब्दों की सच्चाई पर तो जाये 
आखिरी साँस पर हूँ संजीवनी तो लाये 

फिर भी उससे शिकवा नहीं क्या पता वो मजबूर हो 
कृष्ण और राधा के ना मिलने का कोई दस्तूर हो 

कमल जैसे कीचड में खिलकर बस यु ही फना होता है 
भरे समन्दर ऐसे ही " हरदीप " जलकर आपसे विदा होता है .

धन्यवाद ,

26 टिप्‍पणियां:

  1. उसकी दीवानगी क्यों मुझे हंसाकर रुला गयी
    बची सारी जिन्दगी में तड़पना सिखा गयी एक सुंदर रचना , बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्यार के दर्द को बिना लाग लपेट के बयान किया है आपने...एक सलाह... प्यार जैसा ढाई अक्षर का शब्द अगर जीवनको रंगीन या बदरंग बना सकता है, तो इसमें से आधा शब्द निकाल दीजिए, जीवन रंगीन हो जाएगा... यार वो है जो ये सारे ग़म, तक़लीफ, बदरंग मौसम, निकाल देता है... आजमा कर देखिए!!

    उत्तर देंहटाएं
  3. दिल का दर्द वो ही जाने जो झेलता है। पर ये एहसास ही प्रेरणा बने तो कोई बात हो। मजबूर वो थे हम क्यों हों..

    उत्तर देंहटाएं
  4. sukh ke badle dukh dene ki agar bhawna tori
    dukh sahne ki shakti dedo yahi prathna mori//

    उत्तर देंहटाएं
  5. @ मेरे सवालो के जवाब उसकी आत्मा से मांगता हूँ
    बस मेरी गलती बता दे पर मैं जवाब जानता हूँ


    सवाल तो जवाब मांगते ही है पर उन्हें दरकिनार कर जाना पड़ता है उनकी फितरत देखते हुए >>>>>>>>
    दरकिनार कर दिये सवालात हमने उनकी उल्फत में
    जानते है जवाब देंगे क्या बेवफाई ही जिनका सवाब है
    पर फिर भी आवाज़ आती है बार-बार जेहन में बस एक
    कहती है अमित मज़बूरी कोई होगी वर्ना वोह थे तो नेक

    उत्तर देंहटाएं
  6. दिल से लिखी बात दिल तक पहुँचती है और बहुत मार्मिक भी होती है.


    कृष्ण और राधा के ना मिलने का कोई दस्तूर हो
    ...इन शब्दों में वाह क्या बात कह डाली.


    कमल जैसे कीचड में खिलकर बस यु ही फना होता है
    भरे समन्दर ऐसे ही " हरदीप " जलकर आपसे विदा होता है .

    ये शेर भी खूब रहा.

    खूबसूरत रचना.

    उत्तर देंहटाएं
  7. फिर भी उससे शिकवा नहीं क्या पता वो मजबूर हो
    कृष्ण और राधा के ना मिलने का कोई दस्तूर हो

    कमल जैसे कीचड में खिलकर बस यु ही फना होता है
    भरे समन्दर ऐसे ही " हरदीप " जलकर आपसे विदा होता है .

    आपने ही सब कह दिया अब क्या कहूँ……………दिल का सारा दर्द उँडेल दिया है।

    उत्तर देंहटाएं
  8. bahut sunder dardeelee dastan liye dil ko choo jane walee rachana..........
    shubhkamnae........

    उत्तर देंहटाएं
  9. मेरे सवालो के जवाब उसकी आत्मा से मांगता हूँ
    बस मेरी गलती बता दे पर मैं जवाब जानता हूँ
    प्रेम की ये ही ख़ासियत है .. सब कुछ अपने आप समझना पढ़ता है ...

    उत्तर देंहटाएं
  10. कुछ ऎसी ही पीड़ा कवि घनानंद के भीतर दबी रही और यूँ बयाँ हुयी —


    अति सूधो सनेह को मारग है जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं।
    तहाँ साँचे चलैं तजि आपनपौ झिझकैं कपटी जे निसाँक नहीं॥
    घनआनंद प्यारे सुजान सुनौ यहाँ एक ते दूसरो आँक नहीं।
    तुम कौन धौं पाटी पढ़े हौ लला, मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं॥ 1


    प्रेम को महोदधि अपार हेरि कै, बिचार,
    बापुरो हहरि वार ही तैं फिरि आयौ है।
    ताही एकरस ह्वै बिबस अवगाहैं दोऊ,
    नेही हरि राधा, जिन्हैं देखें सरसायौ है।
    ताकी कोऊ तरल तरंग-संग छूट्यौ कन,
    पूरि लोक लोकनि उमगि उफ़नायौ है।
    सोई घनआनँद सुजान लागि हेत होत,
    एसें मथि मन पै सरूप ठहरायौ है॥ 2

    धीरे-धीरे इस वियोग की ज्वाला ने उनके अनुराग को मंजीठ कर दिया.

    इस वियोग की ज्वाला का बड़े-बड़े महाकवियों से वास्ता पड़ा है. कवि जयशंकर ने इसे शीतल ज्वाला कहा है.

    उत्तर देंहटाएं
  11. भावनाओं को समझने ओर उन्हें इतना सम्मान देने के लिए आप सब का आभार....अभी घटनाक्रम कुछ ऐसा सा हो रहा है कि ब्लॉग से स्वतः ही दूरी बन गयी है...नियमित तो क्या........थोड़ी बहुत देर के लिए भी नहीं इधर आया जाता...तो मै क्षमा चाहूँगा जो अब नियमित संपर्क मै नहीं बना पाया तो....

    कुंवर जी,

    उत्तर देंहटाएं
  12. bahut khoob likha ha, shabd bhavnao ka sundar warnan karte ha

    उत्तर देंहटाएं
  13. कमल जैसे कीचड में खिलकर बस यु ही फना होता है
    भरे समन्दर ऐसे ही " हरदीप " जलकर आपसे विदा होता है .

    आपने ही सब कह दिया अब क्या कहूँ……………दिल का सारा दर्द उँडेल दिया है।

    उत्तर देंहटाएं
  14. Bahut Gile Shikwe He Us Se..
    Pr Dil Se Uska Naam Mitau To Kaise..??
    Dard Boht Diye He Usne..
    Uske Hi Diye Zakhm Use Dikhau Bhi To Kaise..??
    Pyar Ko Mzak Smjh Liya Usne..
    Mere Pyar Ki Inteha Use Dikhau To Kaise..??
    Reh Reh Kr Khayal Usi Ke Aate He...
    Is Dil Ko Kahi Or Behlau To Kaise..??
    Bar Bar Yaad Aati He Uski Kahi Baatein..
    In Intzar Krti Aankhon Ko Sulau To Kaise..??
    Salo Huye Ruth Ke Baitha He Wo Mujhse..
    Ab Dur Reh Kar Use Manau To Kaise..??
    Pta He Ab O Laut Ke Nahi Aayega Shayd..
    Is Dil Ko Ye Baat Samjhau To Kaise..??
    Andaza Nahi Lga Paya O Mere Pyar Ka..
    Is Pyar Ki Inteha Use Batau To Kaise..??
    Be-inteha Mohbbat Sirf Usi Se He..
    Kisi Or Ke Liye Khud Ko Savarungi To Kaise.. ??
    Dur Chala Gaya He Wo Mujhse Bahut..
    Phir Uski Khwaish Me Puri Zindgi Gujaru Bhi To Kaise..

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. jiski lachari hoti hai vo hi use mehsus kar sakta hai..
      aapne bahut hi gahre bhaav saral shabdo me utaar diye... bas kai baar padha.. pta nahi kyu bahut kuchh apna sa lagta raha.. yu lga jaise samne baith kar kisi ki aankho ko padh raha hun..

      हटाएं
  15. मैंने जब भी #सौंदर्य को #व्याख्यित करना चाहा,

    एक उसका #ख्याल ही मेरे इस #पागल मन में आया,

    मुझे ना #भाया इस जीवन में उसके जैसा #सुन्दर मोती,

    #कितना अच्छा होता जो पास मेरेे वो #अब भी होतीं,

    जब भी #याद करता हूँ उसकी वो सारी #चित्ताकर्षक बातें,

    रात #करवट लेती है दिन में और #दिन में होतीं है रातें,

    उसकी #महकी साँसों का जब जब होता है #अनुभव,

    मन को #व्याकुल कर जाती है उसकी उन #रातों की भाव,

    उसका वो #अधिकार जताना #अब भी याद आता है,

    लेकिन उसका #पास ना होना #तीर चला जाता है,

    इस जीवन में अब तो मेरी यहीं रहेगी प्यास

    मूरत वो सुंदरता की क्यूं नही है मेरे पास

    उत्तर देंहटाएं

लिखिए अपनी भाषा में

Google+ Followers